हिंदी भाषा

हिंदी भाषा

भूमिका 

हिंदी—भावनाओं, संस्कारों और राष्ट्रीय अस्मिता की भाषा

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस की आत्मा, संस्कारों की संवाहक और भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति है। यह वह सूत्र है जो विविधताओं से भरे भारत को एकता के धागे में पिरोने का कार्य करती है। हमारे इतिहास, संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य और पारिवारिक मूल्यों की सुगंध हिंदी के शब्दों में सहज रूप से अनुभव की जा सकती है। यह भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि प्रेम, अपनत्व, विश्वास और राष्ट्रीय गौरव की जीवंत पहचान है।

प्रस्तुत स्वरचित रचना में कवयित्री ने हिंदी के प्रति अपने प्रेम, सम्मान और आत्मीयता को अत्यंत सरल, भावपूर्ण और प्रेरणादायी शब्दों में अभिव्यक्त किया है। रचना हिंदी को भारतीय संस्कृति की आधारशिला, सभ्यता की वाहक और राष्ट्र की पहचान के रूप में प्रस्तुत करती है। साथ ही यह संदेश भी देती है कि हिंदी हमारे पूर्वजों की धरोहर, हमारी भावनाओं की भाषा और भविष्य की दिशा देने वाली शक्ति है।

आइए, हिंदी दिवस के इस पावन अवसर पर इस सुंदर काव्य रचना के माध्यम से अपनी मातृभाषा के गौरव, महत्त्व और आत्मीयता को हृदय से अनुभव करें।

कविता

हिंदी दिवस 

आओ करें अपनी भाषा को प्यार 

हिंदी भाषा बिना नहीं, है कोई आधार 

पूर्वजों ने भी तो दिए हैं, हमें ये संस्कार 

गीता भागवत और महाभारत का उपहार 

उच्च संस्कार सभ्यता और संस्कृति है हिंदी 

हमारी कविताओं को उच्चता पर पहुंचाती है हिंदी 

कश्ती फंसेगी जब कभी, तूफानों के भंवर में

उस दिन पार कराएगी, वो पतवार  है हिंदी 

हिंदी से ही भारत की विश्व में पहचान है 

हिंदी भारतीयों के दिलों की जान है 

विभिन्नता में एकता को दर्शाती है यह हिंदी

मां भारती के भाल की बिंदी है यह हिंदी 

हिंदी भाषा में प्यार और  विश्वास का, 

होता है अपनापन 

मां ने बचपन से ही सिखाई है हिंदी 

नदियों की धार,  बागों की बहार है हिंदी 

नमस्कार है तुझे हमारी प्यारी हिंदी 

🙏🏻जय हिंद, जय भारत🙏🏻

स्वरचित रचना



डिंपल अग्रवाल 

छत्तीसगढ़ (सरिया)

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 








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