सेवानिवृत्ति के बाद ऐसे जिएं - श्री संगीत शर्मा
सेवानिवृत्ति के बाद ऐसे जिएं
सड़कों के किनारे पौध लगाते और निर्धन बच्चों के लिए भोजन सामग्री तैयार करते ये हैं उत्तराखंड के मूल निवासी रवींद्र भर्तृहरि। वर्तमान में सैनिक विहार मेरठ में रह रहे श्री भर्तृहरि ने 510 आर्मी बेस वर्कशॉप में ड्राफ्टमैन के पद से सेवानिवृति के बाद पौधारोपण और गरीब बच्चों की सेवा सुश्रुषा को ही शेष जीवन का लक्ष्य बना लिया है।
वर्ष 2024 में दिल्ली-देहरादून बाईपास और मेरठ-करनाल मार्ग पर रोपे गए 1000 पौधों से उनकी यह परमार्थ योजना शुरू हुई। अपने एकाकी प्रयास से श्री भर्तृहरि जी प्रतिदिन सड़क किनारे दो से तीन पौधे रोपते रहे। वे रोपे गए प्रत्येक पौधे पर उसका नाम भी लिखते हैं और निरंतर उनकी देखभाल भी करते हैं।
एक दिन उन्हें यह देखकर मार्मिक पीड़ा हुई कि नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण की टीम ने विद्युतीकरण और विकास के नाम पर इनमें से अधिकांश पौधों को उखाड़ दिया। फिर भी इन्होंने हार नहीं मानी और अपने पैतृक गाँव सिंदी पौड़ी गढ़वाल में पौध लगाने के पुण्य कार्य को आगे बढ़ाया। तीज त्यौहार और राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर वे सड़क किनारे गुजर-बसर कर रहे बच्चों को अपने हाथ से बनाकर भोजन कराते हैं हलवा-खीर खिलाते हैं। श्री रवींद्र जी के दोनों बेटे सेवारत हैं तथा बेटी विवाहोपरांत अमेरिका में रह रही है।
वर्तमान में वे मेरठ और उत्तराखंड आते जाते रहते हैं ताकि उनके कार्यों में संतुलन बना रहे। रवींद्र जी का कहना है कि ऐसे कामों से मुझे आत्मिक आनंद का अनुभव होता है।
सैंक्चुअरी शिवयोग फाउंडेशन से जुड़े श्री रवींद्र जी अपने सामाजिक लक्ष्यों की पूर्ति में अवधूत बाबा श्री शिवानंद जी के उपदेशों और आशीर्वाद को सहायक मानते हैं। पूर्णतया अध्यात्मवादी रवींद्र जी सहज योगी हैं। नित्य सुबह शाम 2 से 3 घंटे की आराधना और जप से उन्हें मानवता के सुपथ पर बढ़ने की निरंतर प्रेरणा मिलती है।
अभियान की बानगी
पाठ्य उन्नयन और प्रस्तुति
















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