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Showing posts from May, 2026

चार स्वर्ण पदकों से रंगों की दुनिया तक : प्रभा भैया से विशेष बातचीत

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तैराकी, योग और कला की अद्भुत साधिका हैं प्रभा भैया भूमिका उम्र जब अधिकांश लोगों के लिए विश्राम का संकेत बन जाती है, उस समय कुछ लोग अपने जीवन की नई ऊँचाइयाँ रचते हैं। 79 वर्ष की आयु में भी जल-योग, तैराकी, चित्रकला, गणेश प्रतिमा निर्माण और साहित्य सृजन में सक्रिय नागपुर की प्रभा भैया ऐसी ही प्रेरणास्रोत शख्सियत हैं। दुबई में आयोजित एक प्रतियोगिता में तैराकी के चार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि जज़्बा उम्र का मोहताज नहीं होता। पानी में योग करने की अनूठी साधना, बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के कला की दुनिया में अपनी अलग पहचान और जीवन को रचनात्मकता के रंगों से भर देने वाली प्रभा भैया से प्रस्तुत है एक विशेष बातचीत। बातचीत प्रश्न १. प्रभा जी, सबसे पहले तैराकी और दुबई में मिले चार स्वर्ण पदकों के बारे में बताइए। यह उपलब्धि आपके लिए कितनी विशेष रही? उत्तर : "तैराकी मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। बचपन से ही खेलों और शारीरिक गतिविधियों में रुचि थी। दुबई में आयोजित प्रतियोगिता में तैराकी में चार स्वर्ण पदक प्राप्त करना मेरे लिए बहुत गर्व और संतोष का क्षण था। इससे म...

विदर्भ की दहकती दुपहरी

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  विदर्भ की दहकती दुपहरी भूमिका कुछ स्मृतियाँ समय के साथ धुंधली नहीं पड़तीं, बल्कि तपती धूप की तरह मन पर स्थायी छाप छोड़ जाती हैं। यह संस्मरण केवल एक स्थान विशेष की गर्मी का वर्णन नहीं, बल्कि उस जीवन का जीवंत दस्तावेज़ है जहाँ प्रकृति अपनी कठोरतम परीक्षा लेती है और मनुष्य धैर्य, सहनशीलता तथा जिजीविषा का पाठ सीखता है। विदर्भ की प्रचंड गर्मी, कोयले की तपिश, लू के थपेड़ों और जीवन की सादगी के बीच गुज़रा बचपन—क्या सचमुच कोई इतनी गर्मी में सामान्य जीवन जी सकता है? यह प्रश्न पाठक को भीतर तक जिज्ञासु कर देता है। आइए, अनुभवों की उसी तपती राह पर चलते हैं, जहाँ सूरज केवल आसमान में नहीं, धरती पर भी उतर आया लगता था। संस्मरण विदर्भ की दहकती दुपहरी हम पहले विदर्भ में रहते थे। गांव का नाम चन्द्रपुर था। ऐसा लगता है कि उसका नाम सूर्यपुर होना चाहिए था। ऐसा इसलिए कहा क्योंकि एक तो वहाँ कोयले की खदानें थीं और दूसरा वहाँ थर्मल पावर स्टेशन था, जिससे मुंबई में विद्युत आपूर्ति होती थी। मई-जून का महीना भारतीय कैलेंडर के अनुसार सबसे गर्म समय होता है। इस दौरान सूरज की किरणें मानो आग बरसाती हैं और गर्म ‘लू’ चल...

कृतज्ञता

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कृतज्ञता शुभ प्रभात आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आप और आपके परिवार को सुख, शांति, स्वास्थ्य और सद्बुद्धि प्रदान करें। जो इस सृष्टि का पालनहार है, वही हमारी हर सच्ची कामना को सुनता है। वही माता-पिता के रूप में हमें प्रेम, संरक्षण और जीवन का आधार देता है। आइए, हम सबके कल्याण की कामना करें। सबका भला हो, सब सुखी रहें। 🙏❤️🌹🙏 आज का विचार समानता, शिक्षा और जिम्मेदारी की ओर एक कदम हाल ही में एक मनोरंजन कार्यक्रम में एक संवाद सुनने को मिला, जिसमें पढ़ाई और अवसरों को लेकर एक व्यंग्यपूर्ण बात कही गई। इस प्रसंग ने सोचने पर मजबूर किया कि समाज में शिक्षा और अवसर हर व्यक्ति तक समान रूप से पहुँचना कितना आवश्यक है। हमारे समाज में समय-समय पर कई प्रकार की सामाजिक दूरियाँ और असमानताएँ रही हैं, जिनके कारण अनेक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का पूरा अवसर नहीं मिल पाया। लेकिन आज समय बदल रहा है। हमारा संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान का संदेश देता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भी समझें। जब हर व्यक्ति ईमानदारी से अपने दायित्व निभाए...

हृदयस्पर्शी छोटी-सी घटना

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हृदयस्पर्शी छोटी-सी घटना कुछ साल पहले की बात है मेरठ स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर के सामने एक घटना हुई जो आज भी यदि याद करता हूँ तो सुकून मिलता है कि समाज में अच्छे लोग सदा से थे, हैं और सदा रहेंगे।  मंदिर के मुख्य द्वार के सामने सदर की ओर से आने वाली सड़क पर एक कार कंकरखेड़ा की ओर जाने वाली सड़क पर धीमी गति से मुड़ी। मुड़ते ही तेज गति से साइकिल पर आ रहा 16-17 वर्ष का एक किशोर सीधे कार से टकराया और सड़क पर जा गिरा उसने तुरंत उठकर भागने की कोशिश की, किंतु तभी कार ड्राइव कर रहे एक सैन्य अधिकारी बाहर निकले। उन्होंने उस किशोर को रोका और गाड़ी को देखा जिसका बंपर टूट चुका था, लड़का घबराया और बोला सर गलती हो गई। सैन्य अधिकारी ने अत्यंत दुलार से पूछा तुम्हें कहीं चोट तो नहीं आई। लड़के ने कहा 'नहीं' लेकिन सर आपका बंपर टूट गया है। अधिकारी बोले "दैट'स ओके" और अपनी कार में बैठकर चले गए। यह वाकया मेरे सामने बामुश्किल एक मिनट में हो गया। मैं सोचता ही रह गया कि इस अधिकारी ने बात को तूल न देकर "दैट'स ओके" कहकर संभावित विवाद को तुरंत निपटा दिया और अपनी ड्यूटी पर चले गए। ...

साहित्य सुमन : सृजन, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त मंच

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साहित्य सुमन  सृजन, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त मंच प्रमिला त्रिवेदी की उपलब्धि पर परिष्कृत अभिव्यक्ति साहित्य सुमन केवल एक साहित्यिक मंच नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण एक सशक्त साहित्यिक उद्यान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल साहित्य-सृजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन भी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ करता है। इस मंच से जुड़े साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों तथा सकारात्मक चिंतन को अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। उनकी रचनाएँ न केवल साहित्य को समृद्ध करती हैं, बल्कि समाज को सार्थक दिशा देने का कार्य भी करती हैं। इस सृजनशील यात्रा में डॉ. अनुराधा प्रसाद जी का मार्गदर्शन अत्यंत प्रेरणादायक और सहयोगपूर्ण रहा है। उनके स्नेहिल निर्देशन में रचनाकारों को समय-समय पर आवश्यक प्रोत्साहन और सहयोग प्राप्त होता रहता है। उनका दृढ़ विश्वास है कि यह साहित्यिक यात्रा निरंतर विकास की ओर अग्रसर रहेगी और आने वाले समय में नई ऊँचाइयों को स्पर्श करेगी। निस्संदेह, साहित्य सुमन भ...