चार स्वर्ण पदकों से रंगों की दुनिया तक : प्रभा भैया से विशेष बातचीत
तैराकी, योग और कला की अद्भुत साधिका हैं प्रभा भैया भूमिका उम्र जब अधिकांश लोगों के लिए विश्राम का संकेत बन जाती है, उस समय कुछ लोग अपने जीवन की नई ऊँचाइयाँ रचते हैं। 79 वर्ष की आयु में भी जल-योग, तैराकी, चित्रकला, गणेश प्रतिमा निर्माण और साहित्य सृजन में सक्रिय नागपुर की प्रभा भैया ऐसी ही प्रेरणास्रोत शख्सियत हैं। दुबई में आयोजित एक प्रतियोगिता में तैराकी के चार स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि जज़्बा उम्र का मोहताज नहीं होता। पानी में योग करने की अनूठी साधना, बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के कला की दुनिया में अपनी अलग पहचान और जीवन को रचनात्मकता के रंगों से भर देने वाली प्रभा भैया से प्रस्तुत है एक विशेष बातचीत। बातचीत प्रश्न १. प्रभा जी, सबसे पहले तैराकी और दुबई में मिले चार स्वर्ण पदकों के बारे में बताइए। यह उपलब्धि आपके लिए कितनी विशेष रही? उत्तर : "तैराकी मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। बचपन से ही खेलों और शारीरिक गतिविधियों में रुचि थी। दुबई में आयोजित प्रतियोगिता में तैराकी में चार स्वर्ण पदक प्राप्त करना मेरे लिए बहुत गर्व और संतोष का क्षण था। इससे म...