गणपति आगमन से विसर्जन तक
गणपति के आगमन के मायने उत्सव से आगे सीमा पांडे 'सीमा' गणपति बप्पा के आने की तैयारी शुरू होते ही वातावरण में जैसे एक अलग ही उत्साह भर जाता है। घरों की सफाई होने लगती है। बच्चे अपनी पसंद की सजावट को लेकर उत्साहित रहते हैं। कहीं पंडाल बन रहा होता है तो कहीं आरती की तैयारी। बाजारों में भी रौनक बढ़ जाती है। चारों ओर सुनाई देता है—गणपति बप्पा मोरया। लेकिन क्या गणपति उत्सव केवल दस दिनों की पूजा और उत्सव है? शायद नहीं। थोड़ा ठहरकर देखें तो बप्पा का आगमन हमें बहुत कुछ याद दिलाता है। खासकर आज के उस समय में, जब हमारी जिंदगी बहुत व्यस्त हो गई है और हम पास रहते हुए भी एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। बप्पा बहाना हैं, मिलने का... कभी पड़ोसी से मिलने के लिए किसी अवसर की जरूरत नहीं होती थी। सुख-दुख अपने आप साझा हो जाते थे। आज समय कम है। बातचीत के लिए भी समय निकालना पड़ता है।ऐसे में गणेशोत्सव एक सुंदर बहाना बनकर आता है।पंडाल की सजावट में कोई फूल लगाता है, कोई रोशनी करता है। कोई प्रसाद की व्यवस्था देखता है तो कोई आरती की। बच्चे भी पीछे नहीं रहते। उन्हें भी अपना छोटा-सा काम चाहिए। इस पूरे माहौल म...