मैंने देखा… एक विचार कैसे संकल्प बनता है? - तस्वीर जी
मैंने देखा… एक विचार कैसे संकल्प बनता है? - तस्वीर जी
चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना का आँखों देखा हाल
19 अप्रैल 2026 का दिन मेरे लिए केवल एक तिथि नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक अनुभूति का साक्षात क्षण था। जब मैं परमात्मा अनुभूति भवन, ब्रह्माकुमारी राजयोग मेडिटेशन केंद्र, गंगानगर मेरठ पहुँचा, तो वातावरण में एक अद्भुत शांति और ऊर्जा का संगम महसूस हो रहा था—जैसे इतिहास स्वयं हमारे बीच उपस्थित हो।
यह बौद्धिक संगोष्ठी केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं थी, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प का प्रारंभ थी—10 मई 1857 के महान क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल जी की संघर्षगाथा को जन-जन तक पहुँचाने और 1857 से 1867 तक अपने प्राण न्योछावर करने वाले लगभग एक करोड़ क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने का संकल्प।
जब चर्चा आगे बढ़ी, तो मेरे भीतर यह स्पष्ट होता गया कि यह केवल मेरठ तक सीमित प्रयास नहीं रहेगा। मैंने स्वयं उपस्थित सभी साथियों के समक्ष यह बात रखी कि शोध संस्थान का विस्तार अब राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में कार्यकारिणी का गठन हो चुका है, जबकि दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मेरा विश्वास है कि अब वह दिन दूर नहीं जब पूरे भारतवर्ष में हर वर्ष इन गुमनाम क्रांतिकारियों को सामूहिक रूप से नमन किया जाएगा।
मैंने यह भी अनुभव किया कि इस वर्ष मई 2026 में जो कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं, वे अब तक के सबसे व्यापक और प्रभावशाली होंगे। पश्चिम उत्तर प्रदेश के 14 जनपदों के साथ-साथ दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और गुजरात में भी यह भाव जाग्रत किया जाएगा।
जब मैंने विश्वविद्यालयों—दिल्ली विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय—में कार्यक्रमों की योजना साझा की, तो उपस्थित जनों के चेहरों पर जो उत्साह था, उसने मेरे विश्वास को और दृढ़ कर दिया कि नई पीढ़ी इस इतिहास को आत्मसात करने के लिए तैयार है।
आगामी 9 मई की राष्ट्रीय संगोष्ठी की चर्चा ने इस संकल्प को और ठोस रूप दिया। यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि इसकी अध्यक्षता पूर्व सांसद एवं वर्तमान में उड़ीसा प्रदेश भाजपा प्रभारी श्री विजयपाल सिंह तोमर जी करेंगे, और अनेक राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति इसे ऐतिहासिक बनाएगी।
इस पूरे आयोजन में एक विशेष अनुभूति तब हुई जब ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से हमें आंतरिक शक्ति का अनुभव कराया। बीके मीनू दीदी द्वारा कराए गए ध्यान ने मन को स्थिर किया, और बीके सोनम दीदी के शब्दों ने यह समझाया कि जब तक हम स्वयं को प्रकाश बिंदु नहीं समझेंगे, तब तक परमात्मा से शक्ति ग्रहण नहीं कर सकते। उस क्षण मुझे यह एहसास हुआ कि क्रांतिकारियों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आत्मशक्ति से ही दी जा सकती है।
कार्यक्रम के संचालन में गुलबीर सिंह जी की सरलता और संकल्प वाचन में प्रधानाचार्या श्रीमती सुगम सिंह धामा जी की गंभीरता ने पूरे वातावरण को एक दिशा दी।
अंततः जब संगोष्ठी अपने निष्कर्ष की ओर पहुँची, तो यह स्पष्ट था कि यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय अभियान का प्रारंभ है—एक ऐसा अभियान जो धनसिंह कोतवाल जी सहित लाखों गुमनाम क्रांतिकारियों के बलिदान को जीवंत रखेगा।
और जब मैंने अंत में यह घोषणा की कि 9 मई को मेरठ में मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा और उसके लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी जी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा, तो मुझे लगा जैसे यह संकल्प अब जनसंकल्प बन चुका है।
आज की संगोष्ठी मेरे लिए एक संदेश बनकर उभरी—
"जब विचारों में सत्य और उद्देश्य में राष्ट्र हो, तो हर छोटी शुरुआत इतिहास रचने की क्षमता रखती है।"
प्रतिभागी विभूतियाँ
प्रोफेसर डॉक्टर हरिओम कटियार, संजीव प्रधान सलारपुर, किरण भाटी, प्रोफेसर विवेक त्यागी, राष्ट्रपति पदक से अलंकृत सरबजीत सिंह कपूर, सुरेंद्र राणा, गुलवीर सिंह पूर्व पार्षद, कैप्टन सुभाष नागर, एडवोकेट नरेश गुर्जर, जगत सिंह दौसा, मोहनलाल वर्मा, विवेक त्यागी, पूर्व इंस्पेक्टर चेतन सिंह धामा और विपिन कुमार बसोया।
प्रतिभागी नारी शक्ति
डाक्टर रेखा राना, प्रधानाचार्या श्रीमती सुगम सिंह धामा, पूनम, अलका चौहान, प्रीति चौधरी, शीतल गहलोत, सरिता नागर आदि।
चित्रदीर्घा
सूचना स्रोत
तस्वीर सिंह चपराना
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति













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