कर्म एवं भाग्य - सुलोचना धनावत
कर्म एवं भाग्य
भूमिका
मानव जीवन सदैव से एक गूढ़ प्रश्न के इर्द-गिर्द घूमता रहा है—क्या हमारे जीवन की दिशा भाग्य तय करता है या कर्म? यह प्रश्न केवल दार्शनिक चिंतन का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक अनुभवों में भी गहराई से उपस्थित है। समान परिस्थितियों में जन्म लेने वाले लोग भी जब भिन्न-भिन्न जीवन पथ पर अग्रसर होते हैं, तब यह जिज्ञासा और प्रबल हो उठती है कि आखिर उनके जीवन का निर्धारण किसने किया—पूर्वनियोजित भाग्य ने या उनके स्वयं के कर्मों ने?
भारतीय संस्कृति में कर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जहाँ यह माना गया है कि भाग्य भी कर्मों का ही परिणाम होता है। मनुष्य को अपने वर्तमान को सजाने और भविष्य को गढ़ने की स्वतंत्रता उसके कर्मों के माध्यम से प्राप्त होती है। प्रस्तुत कथा इसी शाश्वत सत्य को सरल, किन्तु प्रभावशाली रूप में उद्घाटित करती है कि जीवन की दिशा केवल परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के प्रति हमारे कर्म और दृष्टिकोण से निर्धारित होती है।
यह कथा हमें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है—क्या हम अपने जीवन को केवल भाग्य के भरोसे छोड़ देते हैं, या कर्म के माध्यम से उसे नया आकार देने का साहस रखते हैं?
कहानी
कर्म एवं भाग्य
पंडित दीनदयाल जी के घर जुड़वां पुत्र हुए ।दोनो का पालन-पोषण एक जैसा हुआ। शिक्षा-दीक्षा भी एक जैसी हुई। पुत्रों के 15 वर्ष की उम्र में पहुँचते ही पंडित जी परमधाम को चले गये। पिता की मौत के बाद एक पुत्र राज पुरोहित बन गया,दुसरा भिक्षा माँग कर जीवन यापन करने लगा।ऐसा क्यो हुआ एक हीं,माता-पिता की संतान एक ही समय में जन्म। किसी ने भिक्षु से पुछ लिया की तेरा भाई राजमहल में और तुम भिक्षुक !ऐसा क्यों ?
उसने इसके लिये अपने भाग्य को दोषी बताया।
राज-पुरोहित,धर्म-कर्म,प्रभू-आराधना,मेहनत करके,आदर के साथ धन प्राप्त कर रहा है तो दुसरा भगवान के नाम पर पैसा मांग रहा है।
कर्म करने पर मनुष्य बहुत कुछ हासिल कर सकता है। भाग्य भरोसे रहने वाले को केवल आटा मिल सकता है,रोटी नहीं। व्यक्ति के अपने कर्म पर निर्भर है कि वह आटे का हलवा बनाता है या रोटी, या फिर कच्चा ही घोल कर पी जाता है।अपने भाग्य का निर्माण व्यक्ति के अपने कर्म पर निर्भर है।
सार
कर्महीन व्यक्ति महज भाग्य की खाते हैं और कर्मयोगी भाग्य को सँवारते हैं।
🙏जय श्री राम🙏
रचनाकार
सुलोचना धनावत
पाठ्य उन्नयन और विस्तार
प्रस्तुति







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