पहल
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जनमानस के नाम एक आवश्यक संदेश
केवल अंक नहीं, प्रतिभा का सम्मान!
प्रिय अभिभावको, शिक्षको और समाज के सजग नागरिको,
क्या हमने कभी ठहरकर सोचा है कि हम अपने बच्चों को किस दिशा में ले जा रहे हैं? हर नए शैक्षणिक सत्र के साथ दीवारों और अखबारों में ‘हाई स्कोरर्स’ के चेहरों की भरमार दिखाई देती है। यह दृश्य अनजाने में हमारे बच्चों के मन में अंकों की एक ऐसी अंधी दौड़ (Rat Race) पैदा कर देता है, जहाँ उनका आत्मविश्वास केवल प्रतिशत के तराजू पर तौला जाने लगता है।
पर क्या वास्तव में शिक्षा का अर्थ केवल अंक हैं?
क्या एक बच्चे की पहचान उसके रिपोर्ट कार्ड के कुछ अंकों तक सीमित हो सकती है?
इन्हीं सवालों ने हमें सोचने पर मजबूर किया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रेवत (जालौर) ने एक छोटा-सा, लेकिन सार्थक प्रयास किया है—एक ऐसी पहल, जिसमें केवल बोर्ड टॉपर ही नहीं, बल्कि हर उस बच्चे को मंच दिया गया है, जो किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है।
हमने अपने विद्यालय के पोस्टर में सुंदर लेखन, काव्य पाठ, नृत्य एवं गायन, खेलकूद, क्राफ्ट, सिलाई, मेहंदी और कृषि जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता दिखाने वाले बच्चों को भी उतनी ही गरिमा और सम्मान दिया है, जितना एक टॉपर को मिलता है।
हमारा विश्वास है:
जब बच्चे के हुनर को पहचाना जाता है, तो वह अंकों की दौड़ में पीछे रह जाने पर भी खुद को कमतर नहीं समझता। वह अपने भीतर की विशेषता को पहचानता है, उस पर गर्व करता है और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सब मिलकर शिक्षा की परिभाषा को व्यापक बनाएं।
बच्चों को केवल ‘प्रतिशत’ तक सीमित न करें, बल्कि उनकी बहुआयामी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें।
आइए, एक ऐसा समाज बनाएं—
जहाँ हर बच्चा सिर्फ अंक नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा के लिए जाना जाए।
यदि यह विचार आपको सही लगे, तो अपने स्तर पर इसे अपनाएं और अन्य विद्यालयों व अभिभावकों को भी इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करें।
🙏
— संदीप जोशी

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