आज का विचार
।।हरिओम।।
आज का विचार
"संसार में जो भी आता है, उसे एक न एक दिन काल का ग्रास अवश्य बनना पड़ता है।"
यह शाश्वत सत्य जितना सरल प्रतीत होता है, उतना ही गहन जीवन-दर्शन अपने भीतर समेटे हुए है। यदि मनुष्य इस तथ्य को निरंतर स्मरण रखे कि जीवन क्षणभंगुर है, तो उसके भीतर समय के प्रति सजगता स्वतः जागृत होने लगती है।
अक्सर मनुष्य आलस्य, टालमटोल और प्रमाद में अपने अमूल्य समय को व्यर्थ गंवा देता है, मानो जीवन अनंत हो। परंतु मृत्यु का स्मरण भय उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देने के लिए होना चाहिए। यह बोध हमें सचेत करता है कि प्रत्येक क्षण बहुमूल्य है और इसे सद्कर्म, आत्मविकास तथा मानवता के हित में लगाया जाना चाहिए।
जब यह जागृति आती है कि समय सीमित है, तब व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनता है। शारीरिक आलस्य दूर होता है, मानसिक जड़ता समाप्त होती है और जीवन में कर्मशीलता का संचार होने लगता है। यही जागृति मनुष्य को उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर करती है।
अतः आवश्यक है कि हम जीवन की नश्वरता को निराशा नहीं, बल्कि प्रेरणा का आधार बनाएं। हर दिन को एक अवसर समझते हुए जागरूकता, सकारात्मकता और सत्कर्म के साथ जीवन जिएं।
विचारक
सुलोचना धनावत
स्थानीय सम्पादिका
उलझन सुलझन लेडीज विंग,
नागपुर (महाराष्ट्र)
पाठ्य उन्नयन और विस्तार
प्रस्तुति








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