हिंदी दिवस
हिंदी दिवस
डिंपल अग्रवाल
भूमिका
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, वह हमारी संस्कृति, सभ्यता, संस्कार और आत्मा की पहचान होती है। हिंदी भाषा ने सदियों से भारतीय जनमानस को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है। यह हमारे भावों की सरल अभिव्यक्ति, रिश्तों की मिठास और राष्ट्र की आत्मीयता का प्रतीक है। हिंदी में वह अपनापन है जो सीधे हृदय को स्पर्श करता है और वह शक्ति भी है जो विविधताओं से भरे भारत को एकता के सूत्र में पिरोती है।
प्रस्तुत स्वरचित रचना में कवयित्री डिंपल अग्रवाल ने हिंदी भाषा के गौरव, उसकी सांस्कृतिक महत्ता और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में अभिव्यक्त किया है। यह कविता हिंदी को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता, प्रेम, विश्वास और संस्कारों की जीवंत धरोहर के रूप में प्रस्तुत करती है। हिंदी दिवस के पावन अवसर पर यह रचना हर भारतीय के मन में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव जागृत करती है।
कविता
आओ करें अपनी भाषा को प्यार
हिंदी भाषा बिना नहीं है कोई आधार
पूर्वजों ने भी दिए हैं हमें ये संस्कार
गीता भागवत और महाभारत का उपहार
उच्च संस्कार सभ्यता और संस्कृति है हिंदी
हमारी कविताओं को उच्चता पर पहुंचाती है हिंदी
कश्ती फंसेगी जब कभी तूफानों के भंवर में
उस दिन पार कराएगी वो पतवार है हिंदी
हिंदी से ही भारत की पहचान है
हिंदी भारतीयों के दिलों की जान है
विभिन्नता में एकता को दर्शाती है यह हिंदी
मां भारती के भाल की बिंदी है यह हिंदी
हिंदी भाषा में प्यार और विश्वास
का होता है अपनापन
मां ने बचपन से ही सिखाई है हिंदी
नदियों की धार बागों की बहार है हिंदी
नमस्कार है तुझे हमारी प्यारी हिंदी
🙏🏻जय हिंद जय भारत🙏🏻
स्वरचित रचना
डिंपल अग्रवाल
छत्तीसगढ़ (सरिया)
पाठ्य उन्नयन और विस्तार
प्रस्तुति






Comments
Post a Comment