यादों की अनमोल पोटली
यादों की अनमोल पोटली
भूमिका
जीवन केवल वर्तमान का नाम नहीं, बल्कि स्मृतियों के उन अनगिनत रंगों का संग्रह भी है जो हमारे व्यक्तित्व, अनुभव और भावनाओं को आकार देते हैं। इसकी कुछ यादें पतझड़ की तरह सूनी और उदास लगती हैं, तो कुछ वसंत बनकर मन को फिर से हरियाली से भर देती हैं। समय चाहे जैसा भी हो, स्मृतियाँ हमारे जीवन की वो धरोहर होती हैं जिन्हें किसी मूल्य में आँका नहीं जा सकता। प्रस्तुत काव्य रचना इसी भाव को अत्यंत संवेदनशीलता से व्यक्त करती है कि वर्षों के अनुभवों, प्रेम, त्याग और आत्मसमर्पण से संजोई गई यादों को कभी भी तुच्छ समझकर छोड़ा नहीं जा सकता।
यादों का पतझड़
आज यादों का पतझड़ है,
तो क्या हुआ,
कल यादों का बसंत आएगा भी तो।
कैसे बेच दूँ!
कबाड़ियों के भाव से,
यादों की पोटली,
जिसको बरसों बाद मैंने,
मोतियों के मोल जोड़ा है एक-एक करके।
मुनाफे में खुद को मिटाया,
जर्रा-जर्रा मिटाकर खुद को,
उसके भाव बेच दिया।
बोलो कैसे बेच दूँ
उन कबाड़ियों के भाव से,
यादों की पोटली को,
जो बरसों बाद मिली है।
प्रमिला त्रिवेदी
स्थानीय संपादिका
उलझन सुलझन, महिला प्रकोष्ठ,
बेंगलुरु
व्याख्या
यह काव्य रचना स्मृतियों के महत्व और उनके भावनात्मक मूल्य को गहराई से अभिव्यक्त करती है। कवयित्री यादों की तुलना एक ऐसी अनमोल पोटली से करती हैं, जिसे उन्होंने वर्षों के अनुभवों, प्रेम, संघर्ष और त्याग से मोतियों की तरह एक-एक कर संजोया है।
आज यादों का पतझड़ है शब्द जीवन के उस दौर का प्रतीक हैं जब मन उदासी, अकेलेपन या विछोह से गुजर रहा है। किंतु कवयित्री आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए कहती हैं कि जैसे ऋतुएँ बदलती हैं, वैसे ही जीवन में बसंत भी अवश्य आएगा।
रचना का मूल भाव यह है कि जिन संबंधों, अनुभवों और भावनाओं को वर्षों की तपस्या से अर्जित किया गया हो, उन्हें कभी भी तुच्छ समझकर या अस्थायी लाभ के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। कबाड़ियों के भाव यहाँ उन लोगों या परिस्थितियों का प्रतीक हैं जो भावनाओं और स्मृतियों का मूल्य नहीं समझते।
शिक्षा
यह कविता हमें शिक्षा देती है कि
जीवन की यादें, अनुभव और रिश्ते अनमोल होते हैं। इन्हें क्षणिक लाभ, परिस्थितियों या दूसरों की उपेक्षा के कारण कमतर नहीं आँकना चाहिए।
हर कठिन समय स्थायी नहीं होता—पतझड़ के बाद वसंत अवश्य आता है। इसलिए हमें अपनी स्मृतियों, संघर्षों और भावनात्मक धरोहरों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वो ही हमारे जीवन की सबसे मूल्यवान पूँजी होती हैं।
कल्पनाकार










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