चलो करें योग
बाल कविता
चलो करें योग
सूरज के उगने से पहले,
चलो योग कर आए।
खुश हो जाए तन-मन सबका,
प्रेम नदी बन जाए ।।
साँसों को लें धीरे-धीरे,
फिर बाहर को छोड़े।
योग भाव से सुन्दर जीवन,
योग जगत से जोड़े ।।
शाला में गुरुवर भी हमको
योग अर्थ बतलाते ।
खेल-खेल में योग कराते
बच्चे खुश हो जाते ।।
तितली बनकर पंख पसारें
पेड़ बने इठलाएँ ।
भ्रमर साधना करते जाते
गुनगुन अलि सा गाएँ।।
बन केशी दहाड़ है करते
नाग बने तन मोड़े ।
तेज निखरता आनन पर है
तन-मन के दुख तोड़े ।।
दादी नानी संग बैठते
सब को योग सिखाए ।
तन-मन को करलें अब पावन
औरों को समझाए ।।
रचनाकार
पाठ्य विस्तार और प्रस्तुति







Comments
Post a Comment