योग भगाए रोग
योग भगाए रोग
भूमिका
आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़, तनाव, अनियमित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता ने अनेक रोगों को जन्म दिया है। ऐसे समय में योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का आधार बनकर सामने आता है। योग शरीर, मन और आत्मा को एकसूत्र में जोड़ने वाली भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। प्रस्तुत दोहों में योग के विविध आयामों तथा उसके स्वास्थ्यवर्धक लाभों का सरल और सरस वर्णन किया गया है। यह रचना प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को योग अपनाने और निरोग जीवन की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।
दोहे
बच्चे वृद्ध युवा सभी, आए करने योग।
सूक्ष्म करे व्यायाम जो, दूर भगाए रोग।।१।।
आसन की तकनीक से, करते प्राणायाम।
कपालभाति भस्त्रिका, मन भाए व्यायाम।।२।।
सूर्य-नमस्कार रोग का, करता जड़ से नाश।
रग-रग में ऊर्जा भरे, ऐसा है विश्वास।।३।।
रोम-रोम खिल जाएगा, हो उच्चारण ओम।
स्वस्थ शरीर बना रहे, कर अनुलोम-विलोम।।४।।
शवासन करते रहो, करता दूर तनाव।
ऊर्जा से भर दे सदा, सहज होय स्वभाव।।५।।
ताड़ासन के योग से, कद बढ़ता ही जाए।
सात्विक भोजन जो करे, अंग बलिष्ठ बनाए।।६।।
रचनाकार
कवि एवं साहित्यकार 'नायक' बाबूलाल नायक
(सेवानिवृत्त लेक्चरर)
टोंक (राजस्थान)
कविता से शिक्षा
1. योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए लाभकारी है और अनेक रोगों से रक्षा करता है।
2. प्राणायाम शरीर को स्वस्थ तथा मन को शांत और एकाग्र बनाता है।
3. सूर्य नमस्कार शरीर में ऊर्जा, स्फूर्ति और सकारात्मकता का संचार करता है।
4. अनुलोम-विलोम और ओम् का उच्चारण मानसिक संतुलन एवं आंतरिक शांति प्रदान करते हैं।
5. शवासन तनाव, चिंता और थकान को दूर करने का सरल एवं प्रभावी साधन है।
6. योग के साथ सात्विक भोजन स्वस्थ, बलिष्ठ और निरोग जीवन का आधार है।
7. नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।
संदेश
"नियमित योग अपनाएँ, स्वस्थ तन-मन पाएँ और निरोग जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।" 🌿🧘♂️🌞

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