जन्मदिन श्रीमती सरोज प्रसाद राय का

जन्मदिन श्रीमती सरोज प्रसाद राय का

अवसर एक नए संकल्प का

जन्मदिन सामान्यतः प्रसन्नता, शुभकामनाओं और उत्सव का अवसर होता है, लेकिन जब कोई संवेदनशील और सजग मनुष्य अपने जन्मदिन को आत्ममंथन की दृष्टि से देखता है, तो यह दिन केवल जीवन में एक वर्ष जुड़ने का उत्सव नहीं रह जाता; वह अपने अब तक के जीवन को देखने, समझने और आने वाले समय के लिए स्वयं को एक नई दिशा देने का अवसर बन जाता है।

सरोज प्रसाद राय जी की ये पंक्तियाँ इसी अंतर्मन की यात्रा का सहज और पवित्र दस्तावेज हैं। इनमें जन्मदिन के उल्लास से अधिक कृतज्ञता, आत्ममूल्यांकन, संघर्षों से अर्जित दृढ़ता और भविष्य के प्रति एक नैतिक संकल्प दिखाई देता है। वे अपने जीवन में आए अनुभवों को केवल बीते हुए प्रसंगों के रूप में नहीं देखतीं, बल्कि उन्हें अपने व्यक्तित्व के निर्माण की पाठशाला मानती हैं। धैर्य सिखाने वाले अनुभवों के प्रति कृतज्ञता और मजबूत बनाने वाले संघर्षों के प्रति आभार उनकी सकारात्मक जीवन-दृष्टि को अभिव्यक्त करता है।

इन भावों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सरोज जी अपनी पहचान को उपलब्धियों, पद या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि चरित्र, विचारों की ईमानदारी, व्यवहार की सादगी और लेखनी की विश्वसनीयता से जोड़ती हैं। यह मनःस्थिति बताती है कि उनके लिए लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि अपने समय, समाज और स्वयं के प्रति एक जिम्मेदारी है।

उनका यह संकल्प कि उनकी लेखनी घृणा नहीं, विचार पैदा करे; उनके प्रश्न केवल व्यवस्था से नहीं, स्वयं उनसे भी उत्तर माँगें; और उनके शब्द तथा कर्म एक-दूसरे के विरोधी न हों—दरअसल आत्मानुशासन, आत्मजवाबदेही और मानवीय संवेदना से निर्मित जीवन-दृष्टि का परिचायक है।

इसलिए सरोज प्रसाद राय जी का जन्मदिन उनके लिए केवल आयु का एक पड़ाव नहीं, बल्कि स्वयं से स्वयं का संवाद और स्वयं को बेहतर मनुष्य बनाने की पुनःप्रतिज्ञा है। उनकी मनःस्थिति में न आत्मप्रशंसा है, न उपलब्धियों का प्रदर्शन; वहाँ विनम्रता है, अनुभवों के प्रति कृतज्ञता है और भविष्य को अधिक सार्थक बनाने की सच्ची आकांक्षा है।

इन्हीं पवित्र भावों को शब्द देते हुए सरोज प्रसाद राय जी कहती हैं—

आज मेरा जन्मदिन है।

मैं इसे केवल अपनी आयु में जुड़ा वर्ष नहीं मानती,

बल्कि अपने विचारों, अपने कर्मों और अपने व्यक्तित्व का आत्ममूल्यांकन करने का एक अवसर मानती हूँ।

मैं उन सभी अनुभवों के प्रति कृतज्ञ हूँ, जिन्होंने मुझे धैर्य सिखाया। 

संघर्षों के प्रति भी आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे मजबूत बनाया और उन लोगों का मैं सम्मान करती हूँ जिन्होंने मुझे यह समझाया कि मनुष्य का सबसे बड़ा परिचय उसका चरित्र होता है।

आज मैं स्वयं से स्वयं एक संकल्प लेती हूँ। 

मैं अपनी लेखनी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सत्य, संवेदना और मानवीय मूल्यों की आवाज़ बनाए रखूँगी।

मैं सदैव ऐसे शब्द लिखूँगी जो किसी के प्रति घृणा नहीं, बल्कि विचार जगाएँ। 

ऐसे प्रश्न उठाऊँगी, जो केवल व्यवस्था से नहीं, स्वयं मुझसे भी उत्तर माँगें। 

और! ऐसा जीवन जीने का प्रयास करूँगी जिसमें मेरे शब्द और मेरे कर्म एक-दूसरे के विरोधी न हों।

यदि आने वाले वर्षों में मेरी पहचान बने, तो वह केवल नाम से नहीं, मेरे विचारों की ईमानदारी और मेरे व्यवहार की सादगी तथा मेरी लेखनी की विश्वसनीयता से बने।

यही मेरे जन्मदिन का मेरे को सबसे बड़ा उपहार होगा।

सभी शुभचिंतकों, मित्रों और परिवार का हृदय से आभार,

जिनके स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं ने मेरे जीवन की यात्रा को अर्थ दिया।

अवसर पर कामनाएं



कृते

 
श्रीमती सरोज प्रसाद राय

 
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