जया जी की कलम
नवांकुर जया
१. जग के नाथ
हे जग के नाथ जगन्नाथ,
भक्तों के तुम प्यारे नाथ,
दुखियों के तुम रहते साथ,
डूबते हुए को देते तुम हाथ।
'पूरी' नगरी की खास बात,
नयनों में करता जगन्नाथ वास,
होते प्रभु रथ यात्रा पर सवार,
तो झूम उठता सारा संसार।
हवा भी करती सत्संग प्रसंग,
'जय जगन्नाथ' स्वर भरे उमंग,
भक्ति के जगते दिल में तरंग,
दर्शन में रमी दिल की पतंग।
भक्ति की ज्योति जगन्नाथ,
राम, कृष्ण, हरि तुम हो नाथ,
बच्चों का पालन करते नाथ,
भक्ति रस का ज्ञान तुम नाथ।
हे त्रिदेव साईं प्यारे जगन्नाथ,
हे चक्का नैन जग के नाथ,
तुम्हारी लीला होती अपरंपार,
गज़ब तेरी बांसुरी की तान।
हे जग के नाथ जगन्नाथ,
भक्तों के तुम प्यारे नाथ,
सबकी करते तुम पूरी आस,
तेरा साथ न छूटे द्वारका नाथ।
२. श्रावण माह की बधाइयाँ 🙏🏻🌸
मेरी स्वरचित कविता - *हे शिव* *जी* ☘️
हे! अनंत दिगंबर आदिदेव,
हे! शिव शंकर त्रिलोकीनाथ,
प्रार्थना है बस यही आपसे,
भक्तों को दिल में रखना अपने।
तेरे नाम की ज्योत में,
झूम उठता सारा संसार।
तेरे डमरू की ध्वनि से,
झूम उठता सारा कैलाश।
ॐ मंत्र के उच्चारण से,
मिटता कष्ट हर आत्मा का।
जो कोई तुझे याद करता,
शिव भक्ति का वरदान मिलता उसे।
कड़ी धूप में तेरे नाम का चंदन,
माथे को देता हर पल ठंडक,
भोले लोगों के तुम हो रक्षक,
भक्ति के रंग से पहुँचते तुम तक।
३. हेलो ज़िंदगी
ज़िंदगी तू है बड़ी खूबसूरत,
रोज़ कलम की स्याही से,
नए विचार सजाती है तू।
हर रोज़ नई उड़ान भरती है,
आज़ाद पंछी बन जाती है,
नए ख़्वाब सजाती है तू!
रोज़ तू अतरंग परिचय देती है,
नए नए गीत गुनगुनाती है,
बड़ा प्यार जताती है तू।
गले हमें तू लगाती है,
मुस्कुराना हमें सिखा देती है,
पहचान हमारी बना देती है।
हर मैदान फ़तेह तू करती है,
हर कदम विजय पाती है,
गुरु हमारी बन जाती है तू।
नए कमाल तू कैसे करती है,
रोज़ रचती नईं कहानी है,
नईं दिशाएं दिखलाती है तू।
कभी सूर्य-सी तेज़ बन जाती है,
कभी चांद सी शीतल बन जाती है,
नए नए रंग दिखलाती है तू।
आंसू तू हमारे पोंछती है,
चेहरे पर रौनक ला देती है,
नए मार्ग बना देती है तू।
खुद की खोज तू सिखाती है,
अच्छा इंसान हमें बनाती है,
जीवन संवार देती है तू।
ज़िंदगी तू है बड़ी खूबसूरत,
रोज़ कलम की स्याही से,
नए विचार सजाती है तू।
जया सूद (कवयित्री और कहानीकार)
❤️🌸💖☘️🍃😇
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