उलझन सुलझन की ओड़िशा प्रांत संयोजिका की पाती अपने प्रिय शिक्षक के नाम

एक पाती अपने प्रिय शिक्षक के नाम

आदरणीया,

प्रधान अध्यापिका जी, 

(बड़ी दीदी जी),

सादर चरण स्पर्श, 

                      आपको कोटि-कोटि नमन। आपके दिए हुए आदर्श और जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए जीवन संतोष और प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त है।

आपने जो हमें दिया वह केवल शिक्षा नहीं थी, वह जीवन जीने की कला संघर्षों का सामना करने की शक्ति और निरंतर बेहतर की ओर चलने की दृढ़ इच्छा शक्ति भी है। आपका आशीर्वाद स्वयं के साथ आज भी हम निरंतर महसूस करते हैं ।

मुझे याद है एक बार किसी प्रतियोगिता में हारने पर आपके कहे वह शब्द"प्रतियोगी होने से प्रतिभागी होना श्रेष्ठ है" आपके इन शब्दों में मेरे जीवन की दिशा ही बदल दी। हार और जीत के बीच में तटस्थ रहना आपने सिखाया।

भले ही आज आप हमारे बीच स्थूल रूप में नहीं है, पर सूक्ष्म रूप में हमारा निरंतर मार्गदर्शन करती है। 

हम जो भी हैं अपने शिल्पकार अपने गुरु की कृति है।

आज शिक्षक दिवस पर पुनः आपको याद करके अपनी श्रद्धा अर्पण करती हूं। आपका स्नेह और आशीर्वाद हम पर निरंतर बना रहे ऐसी विनम्र प्रार्थना। 

आपकी  आज्ञाकारी  शिष्या                     

हिना  मानेक

बाल मंदिर  

रायगढ़

चित्रांकन

प्रस्तुति और सहयोग









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