नदी की तरह कल-कल बहती हुई हिंदुत्व की पहचान है... हिंदी
नदी की तरह कल-कल बहती हुई हिंदुत्व की पहचान है... हिंदी
हमारा आत्मसम्मान और देश की शान है हिंदी
बचपन की शुरुआत ही हिंदी शब्द माँ से शुरू होती है जो आगे जाकर ककहरा में तब्दील होते हुए भावनाओं को शब्द देकर आगे बढ़ती है।शब्दों की धार ,वार और प्रवाह जो हिंदी में है वह और कहीं नहीं। हर भावना को अपने तरीके से व्यक्त करने के लिए शब्दों का अपार भंडार हिंदी के पास होता है तभी तो कलम खिलती है इंद्रधनुषी रंग लिए शब्दों के साथ। सरलता और सहजता लिए जब हिंदी में कोई बात समझाई जाती है तो हर कोई समझ कर मुस्कुरा उठता है क्योंकि...
दिल से दिल का संवाद है हिंदी
अपनेपन का अनुवाद है हिंदी
हिंदी यह एक भाषा ही नहीं बल्कि अपने साथ संस्कृति व संस्कारों की पायल पहन, राष्ट्र की एकता को साथ लेकर खनकते हुए आगे बढ़ती है। जब ख्यालों की जमीन पर किसी-किसी के शब्द एहसासों की बारिश बनकर भिगोने लगे, दिल का मौसम बदलने लगे और जुबान पर मिश्री सी मिठास घुलने लगे तब समझ जाओ यह हिंदी का ही कमाल है। हिंदी में हम जीते हैं। उसके हर शब्द माँ की तरह हमें सहलाते हैं। बचपन के इंद्रधनुषी मासूम शरारतों को साथ लिए मुस्कुराने लगती है हिंदी। तब परिंदों की तरह खुले आसमान में उड़ने लगते हैं हम अपनी भाषा के साथ क्योंकि यही हमारी पहचान है ।जिस तरह माँ के नाम से हमें पहचाने जाने पर जो खुशी मिलती है ठीक वही खुशी हमें हमारी राष्ट्रभाषा अपनाने से मिलती है क्योंकि हम भारतीयों की आन-बान-शान और पहचान है....हिंदी।
जय हिंद की तरह ही हिंदी का जयकारा हम तभी लगा पाएंगे जब दिल से हम हमारी इस स्वदेशी भाषा को अपनाएंगे। तभी तो हम हिंदुस्तानी कहलाएंगे.
प्रस्तुति






Comments
Post a Comment