भावाभिव्यक्ति

 हमारे घर की कृष्ण जन्माष्टमी

आस्था, उत्सव और प्रेम का पर्व

कृष्ण जन्माष्टमी हमारे लिए केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और आनंद से भरा हुआ वह विशेष अवसर है, जिसका पूरे वर्ष इंतज़ार रहता है। जैसे ही जन्माष्टमी का पर्व नज़दीक आता है, घर में एक अलग ही उत्साह दिखाई देने लगता है। मन में श्रीकृष्ण के बाल रूप की सुंदर छवि बस जाती है और घर को कान्हा के स्वागत के लिए सजाने की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हमारे घर में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हर साल अलग-अलग झाँकी सजाते हैं। आसपास के लोग उत्सव देखने और दर्शन करने आते हैं। भोग-प्रसाद, भजन-कीर्तन भी होता है।

हमारे लिए यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें केवल हमारा परिवार ही शामिल नहीं होता, बल्कि आसपास के लोग भी पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। घर में सजाई गई झाँकी देखने के लिए जब लोग आते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हमारा छोटा-सा घर भी उस दिन नंद बाबा के आँगन में बदल गया हो।

हर वर्ष झाँकी को कुछ नया रूप देने का प्रयास रहता है। कभी बाल गोपाल की मनमोहक छवि सजाई जाती है, कभी गोकुल का वातावरण बनाया जाता है, तो कभी माखन चुराते नटखट कान्हा की झाँकी मन मोह लेती है। सजावट में फूल, रोशनी, रंग-बिरंगे वस्त्र और छोटी-छोटी सुंदर वस्तुओं का प्रयोग करके हम अपने सामर्थ्य के अनुसार कान्हा का संसार रचने की कोशिश करते हैं।

झाँकी सजाते समय घर के सभी लोगों का उत्साह देखते ही बनता है। कोई सजावट करता है, कोई फूल लगाता है, कोई प्रसाद की तैयारी में जुट जाता है और कोई भजन-कीर्तन की व्यवस्था करता है। इन तैयारियों के बीच हँसी-मजाक और कान्हा के भजनों की मधुर धुन वातावरण को और भी आनंदमय बना देती है।

शाम होते-होते घर में भक्तों और दर्शनार्थियों का आना शुरू हो जाता है। बच्चे विशेष उत्साह के साथ झाँकी देखते हैं और बड़े श्रद्धा से श्रीकृष्ण के दर्शन करते हैं। कुछ देर के लिए ऐसा लगता है मानो घर की सारी व्यस्तता पीछे छूट गई हो और वातावरण में केवल भक्ति ही भक्ति है।

भजन-कीर्तन के समय तो वातावरण और भी आध्यात्मिक हो जाता है। श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण करते हुए जब सभी मिलकर भजन गाते हैं, तो मन को एक अद्भुत शांति मिलती है। लगता है जैसे कान्हा सचमुच हमारे बीच आकर अपनी बाँसुरी बजा रहे हों।

रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय आते ही उत्सव अपने चरम पर पहुँच जाता है। घंटियों की ध्वनि, जयकारों और भजनों के बीच बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है। श्रद्धा से आरती होती है और फिर सभी को भोग-प्रसाद वितरित किया जाता है।

इस पूरे आयोजन की कुछ सुंदर यादों को हमने तस्वीरों और वीडियो में भी संजोया है। तस्वीरें उस दिन की सजावट, झाँकी और भक्तिमय वातावरण की याद दिलाती हैं, जबकि वीडियो में उस उत्सव की चहल-पहल और हमारे घर की खुशियाँ जैसे फिर से जीवंत हो उठती हैं।

हर साल जन्माष्टमी आती है और चली जाती है, लेकिन अपने पीछे छोड़ जाती है ढेर सारी मधुर स्मृतियाँ। झाँकी सजाने की खुशी, लोगों का आना, बच्चों की उत्सुकता, भजन-कीर्तन, प्रसाद और आधी रात को कान्हा के जन्म का वह पावन क्षण—ये सब हमारे जीवन की अनमोल यादों का हिस्सा बन जाते हैं।

मेरे लिए श्रीकृष्ण केवल मंदिर में विराजमान भगवान नहीं, बल्कि घर-आँगन की उस खुशी का नाम हैं, जो हर जन्माष्टमी पर हमारे जीवन को प्रेम और भक्ति से भर देती है।

कान्हा से यही प्रार्थना है—

हमारे घर-आँगन में यूँ ही प्रेम, शांति और खुशियों की बाँसुरी बजती रहे और उनकी कृपा सब पर बनी रहे।

जय श्रीकृष्ण!

 राधे-राधे!

झलकियाँ








रचनाकार

प्रमिला त्रिवेदी














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