मैं ना भूलूँगी - विजया डालमिया

 मैं ना भूलँगी

बचपन की तरह बचपन की यादें भी बेहद खूबसूरत और मासूम होती हैं। थोड़ी-सी नादानी, थोड़ी-सी शरारत और बहुत सारी मस्ती के साथ गुजरता बचपन अपनी यादों की अमिट छाप छोड़ जाता है। जब कभी हम उन यादों से रूबरू होते हैं, उम्र चाहे कितनी भी क्यों न हो, होठों पर मुस्कुराहट आ ही जाती है।

ऐसा ही एक वाकया है, जिसे याद करते ही आज भी मेरे होठों पर मुस्कान आ जाती है।

अग्रसेन जयंती की तैयारी में घर के सभी लोग जोर-शोर से जुटे थे। हमारी बड़ी दीदी ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में मेरा और मेरे भाई का नाम दे दिया। भाई मुझसे साल भर बड़ा था। मुझे इंदिरा गांधी बनाया गया और भाई को जोकर।

दीदी ने इसके लिए काफी मेहनत की। भाई को बार-बार डायलॉग रटाए गए। बोलने का अंदाज सिखाया गया। किस तरह हँसना है, यह भी बताया गया। मुझे हल्के मेकअप के साथ स्पीच देनी थी। मैंने वह याद कर ली थी।

प्रतियोगिता के दिन मेरा पहला नंबर था। मैं स्टेज पर गई और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी स्पीच बोलकर वापस आ गई।

अब भाई की बारी थी।

वह काफी नर्वस हो रहा था। दीदी ने उसे हौसला देते हुए कहा—

“देख, ये तुझसे छोटी है, फिर भी कर आई।”

जैसे-तैसे भाई ने हिम्मत जुटाई और स्टेज पर जाकर बोलना शुरू किया—

“मैं जोकर हूँ…”

यह कहते हुए उसने दीदी की तरफ देखा।

दीदी ने इशारे से आगे के डायलॉग बोलने को कहा और हँसने का इशारा किया। लेकिन भाई वहीं अटक गया। नर्वस होकर हँसने की कोशिश करते-करते वह इतना घबरा गया कि रो पड़ा।

दीदी ने उसे वापस आने का इशारा किया।

लोग ताली बजाते हुए हँसने लगे। तभी पीछे से किसी ने चुटकी ली—

“अरे, इंदिरा गांधी का भाई रो रहा है!”

और एक बार फिर सब खिलखिलाकर हँस पड़े।

भाई ने जोकर बनकर सचमुच लोगों को हँसा दिया था।

उस वक्त तो यह सिर्फ एक मजेदार घटना थी। हम भी हँसे थे। लेकिन बड़े होने पर जब भी यह बात याद आती है, जाने क्यों मुझे राज कपूर की मेरा नाम जोकर याद आ जाती है।

तब लगता है—

जोकर की हँसी में भी दर्द छिपा होता है

और उसके रोने में भी हँसी।

शायद जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है।

हमेशा जो दिखाई देता है,

वह पूरा सच नहीं होता।

बचपन का वह छोटा-सा मंच, भाई का घबराना, उसका रो पड़ना और लोगों का हँसना—सब आज भी मेरी स्मृतियों में बिल्कुल वैसा ही जीवंत है।

कुछ यादें उम्र के साथ पुरानी नहीं होतीं,

वे बस हमारे भीतर और गहरी उतरती जाती हैं।

मैं ना भूलँगी।

विजया डालमिया

Comments

Popular posts from this blog

हिंदी भाषा

सेवानिवृत्ति के बाद ऐसे जिएं - श्री संगीत शर्मा

रात भर एक करवट है माँ - विजया डालमिया (मदर्स डे पर विशेष)